रहबर ही रहजन हो तो रहगुज़र है कहाँ,
रहनुमा बता राहगीर जाएँ तो जाएँ कहाँ ।
......... रजनीश जनवरी १९९२
महफ़िल से "राज" यूँ तेरी रूखसत न होगी आसान,
साजो को अभी नए फ़नकारो से नही हुई है पहचान ।
- रजनीश ६ मई २००८
मंजिल पाने की चाहत "राज" वो करते है, जिनको है सुस्ताना ।
आवारगी हो जिनका जूनून, उन्हें तो चलते ही है जाना ।
............... रजनीश २ नवम्बर २०१०
नाकामियाँ ही मुक़द्दर में लिखी थी उसके,
तोड़ा था दम उसने करवट बदल-बदल के,
शायद खुदा भी गमगीन हुआ होगा तब,
उसने "राज" यह नज़ारा देखा होगा जब ।
............. रजनीश २ अक्टूबर २०११
मेरा साया भी तो मेरा हमसफर न बना,
जब से "राज" उजालों ने मेरा साथ छोड़ा ।
- रजनीश १२ अक्टूबर २०११