Friday, May 31, 2019

#कृष्ण

मन मोहनी सुरीली मेरे साँवरे की मुरली बाजे,
गाँठ रहित बाँसुरी मधुर सुर मन को खूब भावे,
गया मुरलीधर छोड़ पीछे अपने वचन अनमोल,
धोके मैल मन की गाँठ खोल बोल मीठे बोल। 
#रजनीश

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