प्याली में दरिया,
औ इक चम्मच चाँदनी,
कुछ बादल उम्मीद के,
कि बस इक टुकड़ा चाँद का
गुजर जाये पूरी रात,
सुबह फिर सूरज के साथ
हाजिर हो गई
एक नयी मसरूफियत लिए साथ।
#रजनीश
औ इक चम्मच चाँदनी,
कुछ बादल उम्मीद के,
कि बस इक टुकड़ा चाँद का
गुजर जाये पूरी रात,
सुबह फिर सूरज के साथ
हाजिर हो गई
एक नयी मसरूफियत लिए साथ।
#रजनीश
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