क्यूँ मुंतजिर हो बारिश की इस बेवजह से मौसम में,
कभी एक बार मेरी आँखों से भी गुजर कर देखो,
वो स्याही जाया करते है गज़ल ए बेवफाई से,
चुन कर लफ्ज़ बयाँ करते हैं वो दर्द ए दास्ताँ अपनी,
कहते हैं बखूबी बातें पोशीदा बडे नक्काश हर्फों में,
पर ना होंगे ज़ियादा जज्बाती मेरे बयान ए चश्मों से,
क्यूँ खोजते फिरते हो *महवश* तुम खामोश झीलों में,
कभी इक रोज़ चुपके से इन आँखों में उतर कर देखो,
दावा है कि भूलोगे बेचैनियाँ इस सारे आलम की,
होगे वाकिफ़ मेरी मोहब्बत की पाकीजगी से।
*महवश - moonface
#रजनीश
No comments:
Post a Comment