आधी आधुरी किताब ………………………………………… कुछ प्रसंग
बातों से ही तो बनती है बात,
बाते शब्दों से बने है जज़्बात ।
जो बात दे दिल को सुकूनात,
वही दिल में करें नश्तर सी घात ।
कभी बातों में बात होती है,
और कभी आप में बात होती है ।
बातों ही बातों में होते है झगड़े,
बातों से ही दूर होते है सब रगड़े ।
बाते तरकश से निकले तीर है,
मन में घर कर जाए वे पीर है ।
बातों ही बातों में बन जाए हस्ती,
गिरते है हम करके बातें सस्ती ।
बातों के भावों को है जिसने साधा,
उस हस्ती को न पहुँचे कोई बाधा ।
बाते और मन का रिश्ता अभिन्न है,
जैसे जल से तरंगे कभी न भिन्न है ।
हानि वृद्धि बीज बातों में है निहित,
बातों से ही चरित्र होता है विदित ।
हृदय में हो प्रेम, सद्भावना व ज्ञान,
अहंकार हो न यह बात तू ले जान ।
आयेगा यह हमें निरंतर अभ्यास से,
बातें होंगी सत्य मधुर प्रिय प्रयास से ।
........ रजनीश १७ जुलाई २०१४
बातों से ही तो बनती है बात,
बाते शब्दों से बने है जज़्बात ।
जो बात दे दिल को सुकूनात,
वही दिल में करें नश्तर सी घात ।
कभी बातों में बात होती है,
और कभी आप में बात होती है ।
बातों ही बातों में होते है झगड़े,
बातों से ही दूर होते है सब रगड़े ।
बाते तरकश से निकले तीर है,
मन में घर कर जाए वे पीर है ।
बातों ही बातों में बन जाए हस्ती,
गिरते है हम करके बातें सस्ती ।
बातों के भावों को है जिसने साधा,
उस हस्ती को न पहुँचे कोई बाधा ।
बाते और मन का रिश्ता अभिन्न है,
जैसे जल से तरंगे कभी न भिन्न है ।
हानि वृद्धि बीज बातों में है निहित,
बातों से ही चरित्र होता है विदित ।
हृदय में हो प्रेम, सद्भावना व ज्ञान,
अहंकार हो न यह बात तू ले जान ।
आयेगा यह हमें निरंतर अभ्यास से,
बातें होंगी सत्य मधुर प्रिय प्रयास से ।
........ रजनीश १७ जुलाई २०१४
No comments:
Post a Comment