मैं लफ़्ज़, तू नज़्म .....
मैं लफ़्ज़, तू नज़्म, मै बूँद, तू समुन्दर,
मैं तुझमें समाया, मैं रहता तेरे ही अन्दर,
मेरे होने या न होने की बात न तू कर,
पहचान मिली मुझे, तुझ में ही खोकर,
मै वर्णमाला, तरन्नुम से तुमने है जोड़ा,
अर्थ देकर तुमने, जीवन रूख है मोड़ा,
करके अलग मुझे, तूने अपने दामन से,
मोती बनाया, मिलाकर सीपी आनन से,
रूप पाया मैंने, भावों मे बन रस कविता,
बहता हूँ प्रेमी दिलों मे बन प्रेम सरिता,
गूँथ दानों दानों में बन जाता हूँ मै माला,
बिछुड़ तुझसे, देता हूँ मै सौन्दर्य निराला,
अक्षर जब जुड़ते है तो बनते हैं विचार,
सोच बन मोती सा करते सबका श्रृंगार,
जीवन वही जिया जिसने सीखा खोना,
वजूद मिटा बाँट ख़ुशी सीखा मुस्कुराना,
मैं लफ़्ज़, तू नज़्म, मै बूँद, तू समुन्दर,
मैं तुझमें समाया, मैं रहता तेरे ही अन्दर।
#रजनीश
Jaise Geeta me likha hai. Ek ek akshar is sansaar ke har insaan k liye hai. Aise hi ye Kavita k akshar b hai.
ReplyDeleteThanks for encouraging
Deleteआध्यात्मिक प्रेम से भरा पूरा कविता
ReplyDelete🙏🙏
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