Monday, July 29, 2019

#TrulyTrue


When the Power of Love overcomes 
 the Love of Power, the World will 
start exhibiting Equanimity. 
#TrulyTrue

Birds sing after a storm; why 
shouldn't  people feel as free to 
delight in whatever remains to them?
#TrulyTrue

Life is a swing between centrifugal and 
centripetal forces. The former pushes to 
explore the limit of sky and the latter pulls
to the core. Between the two life exists. 
#TrulyTrue

Be always careful in Insulting someone 
because it becomes Debt on other person 
who may wish to Repay it with interest. 
#TrulyTrue
Love and compassion are necessities,
not luxuries. Without them, humanity 
cannot survive.
#TrulyTrue

Sunday, July 28, 2019

#TrulyTrue

Most Appreciations lead to a Bridge under 
which a River of Selfishness flows !!!
#TrulyTrue

Teachers open the door. You enter by yourself.
#TrulyTrue

Learning is a weightless treasure you always 
carry with ease. 
#TrulyTrue

Cheap things are not good, 
good things are not cheap.
#TrulyTrue

Always, good times or bad, remember the person 
who spared his time to listen to you. 
#TrulyTrue

Thursday, July 18, 2019

#कृष्ण


कान्हा तू राजा तो राधारानी कल्याणी
थिरकते चरणों की रज मेरी जिंदगानी
मैं तेरा दास अरदास करू तेरी बिहारी
तुम्हारे चरणों में उमर कट जाये सारी। 
#रजनीश

#कृष्ण


नींद नहीं आती, अपने गुनाहों के डर से हे गिरधारी,
सो जाता हूँ, सोचकर, तेरा नाम जो है बक्शनहारी। 
#रजनीश

Sunday, July 14, 2019

#कैद_हूँ_ख्वाबों_में

थमी थमी सी हवाएँ, सहमा सहमा सा है कोहरा,
साँसें हैं थमती, याद जब जब आये तेरा चेहरा। 
आसमाँ जब जब रंग बदले, मुठ्ठी से चाँद फिसले,
बदरी हिस्से मेरे आती, लड़ी सितारे जब तू है सजाती। 
क़ैद हूँ ख़्वाबों में, अक्स आइने में है कौन देखता,
टपकना ही है इसे, अश्क़ आँखों में हैं क्यूँ पिघलता। 
वफ़ा तुम ने मुझसे है निभायी कुछ इस क़दर, 
तोहफ़े मे दुश्मनों को ही तुम ने थमा दिया खंजर। 
बेवफाई ख्याल किसे, ख्वाबों को जो पाल लिया,
ख़ंजर डर क्या, ख़्यालों ही ख़ुद घायल कर लिया।
मिलना नही इस दुनिया मे, मैने नई दुनिया बना ली,
यादों को बसाकर, ख़्बावों की नई दुनिया बसा ली। 
#रजनीश

Saturday, July 13, 2019

#कृष्ण


भक्ति तेरी ऐसी देना श्याम, भूल तुम्हे ना पाऊँ मैं,
साँझ सवेरे हर पल कान्हा, तेरा ध्यान लगाऊँ मैं।
#रजनीश

Tuesday, July 9, 2019

#पक्का_सच


इश्क़ जुनूं भी है संजीदगी भी है,
यह कुर्बत भी है, फुरकत भी है,
यह पाकीजगी की वुसअत भी है
रूह मे लिपटी रिफायते बंदगी है।
#रजनीश

#अनकही_स्मृतियाँ

रात सलाखों पर सिर रखकर कराहती ही रही,
ना ख़्वाब आये ना तुम नींद बेवफ़ा ही बनी रही।
#रजनीश

Monday, July 8, 2019

हम जब से मशहूर हुए ....


हम जब से मशहूर हुए, शहर में हमारे चर्चे शुरू हुए,
रिश्ते नाते निभने लगे, दरवाज़े हमारे वो दिखने लगे। 
कामयाब ज़रूर हुए, पर इल्ज़ामों से जुदा कहाँ हुए,
पेड़ फल जब आए, पत्थर भी उसके हिस्से आए। 
किस्मत हुई मेहरबान, यह शहर नही मुझसे अनजान,
चढ़ते सूरज को करे सलाम, शहर में है मेरा नाम। 
नकारा था जिन्होंने मुझे, ग़ुरूर था उन्हे अपनी उड़ानों में,
भरोसा क़तई ना था उन्हे, मेरे मज़बूती पाते हुए परों में।
जब तक सीधा चले थे, पीठ पर ख़ंजर खाते आए थे,
थोड़ा चाल बदलकर हमने, ज़माने के होश उड़ाये थे। 
चल पड़ा हूँ सफ़र को तो फिर हौसला रखना ज़रूरी है,
वक़्त बेवक्त रश्मे रिवायत निभाना भी तो मजबूरी है।
#रजनीश

Sunday, July 7, 2019

#अनकही_स्मृतियाँ


तेरे भेजे हर ख़त में, एक अख्श निहारता हूँ,
और देखकर उसको, उसपे ही मर जाता हूँ।

हर उठती हुई आहट में तेरी आती सी सदायें है,
तेरी कुशादगी ही तो आज मेरी बनी सज़ाएँ है।

कुछ रिश्ते जुड़ से जाते है जो टूटने पर करते है आवाज़,
उन रिश्तों को कैसे जोड़ू, जो टूटने पर नहीं करते है आवाज।

तुम नहीं, ना है तेरा वो एहसास, नाहीं है वो अब समां,
साथ अब मेरे है मेरी जुस्तजू और कुछ बीते हुए लम्हा।

जिन्दगी खीचकर मुझको, कुछ ऐसे मुकाम पर है ले आई,
जहां बीते लम्हों को जोड़के, मैंने तेरी यादों की तस्बीह है बनाई।

थी मेरी जुर्रत साहिल को पाने की, सैलाबों में कश्ती को पार लगाने की,
वोह क्या जाने इश्क है क्या, जिन्होंने किनारों पर ही है सफ़र किया।

वो एक लम्हां तो मुझे याद है, 
तुझे याद है कि नहीं मुझे नहीं पता,
वो तेरा पलके उठाकर जानिब,
फिर गिरा लेना आज भी दिल में है चुभता,
वो तेरी मासूम सी निगाहों का,
बैचनियों से ढूढ़ना मुझको है नहीं भूलता,
वो एक लम्हां तो मुझे याद है, 
तुझे याद है कि नहीं मुझे नहीं पता।

#अनकही_स्मृतियाँ


कुछ उड़ी उड़ी कुछ खोई खोई सी है ये धूल,
चाँद के आँचल को पाने की इसने की है भूल,
भूली है ये रास्ते जो जाते हैं इस के जहां को
मजबूर है बेगानों के शहर में पनाह पाने को।

हो के अब मैं तुम से हमजुदा, जीता हूँ मैं पाने को इनायते खुदा,
जलसे तेरे शरीक थी कायनात, एक था बदनसीब गवाहे वाक्यात।

संवरती हुई मेरी इस जिन्दगी में फिर से एक हलचल हुई है,
पैगाम भेजकर तुमने ख़त में मेरी सलामती की जो खबर ली है।

आसमां छूने की तमन्नाएँ जमीं से दूर तुमको हैं ले आई,
फ़ैले हुए आसमां की हदों से, तेरे जहां में पसरी तन्हाई।

थी तू मेरी जद से कहीं दूर बनके किसी और की आँखों का नूर,
भेजके पैगाम ये सितम किया ताउम्र हमको इंतज़ार का जख्म दिया।

#अनकही_स्मृतियाँ


तेरी उल्फत की निशानियाँ पे ही बन रहा था मेरा यह घरौंदा, 
जालिम ने मांगकर उन बुतों को सुपुर्दे खाक कर दिया बुतकदा।

थमते हुए दिल में है ठहरा एक समुन्दर गहरा
चाँद भी पा गया है कोई आशना कोई दूसरा।

यूँ जा रहे हो, जैसे लौट कर अब कभी ना आओगे,
तन्हा जब होगे रहबरे रहगुज़र हम ही को पाओगे।

रेज़ा रेज़ा दिल है बिखरता जैसै पतझड़ पत्ता पत्ता है टूटता,
माझी थे जो उन्होंने ही डुबो दी कश्ती अश्कों के सैलाब में।

फिजाओं ने भी है मुंह मोड़ा जबसे तुमने मझधार बीच हाथ है छोड़ा,
फिजाओं संग तेरी रवानी से क्यूँ नहीं हैरानी है अपनी परेशानी से।

#अनकही_स्मृतियाँ


तू जमीं और मैं हूँ एक तन्हा सा आसमाँ,
उफ्क़ ही है सिर्फ हमारे मिलन का निशां।

चाह में तू अब्र की है तड़पती और अपने रूप है बदलती,
वो तो ठहरा सितमगर कभी न ठिठका तेरी इन रहगुजर।

अब है न कोई रंज हमको तुम्हारी रुसवाई से,
आदत हो गई हमारी बाते करने की तन्हाई से।

तू चाहे चली जा जितनी दूर, समझकर मुझको एक आवारा
पर तुम हो किसी और के करीब हो ये कैसे दिल को गवारा।

अब बिन तुम ही मेरा बनने लगा है एक सियाह बसेरा,
तिल तिल जल रहा दिल दूर करने को पसरा अँधेरा।

#अनकही_स्मृतियाँ

हसीन ख्वाबों का घरौंदा बनाता रहा मैं, और 
नादानी में उसके तले तेरे आरमनों को रोंदता रहा
छोड़ा था तूने मासूमियत भरा एक पैगाम मेरे नाम
इल्म न था कि ये ज़माना कर देगा हमको बदनाम।

रेज़ा रेज़ा होकर ख्वाब टूटने लगे हैं
जब से वो हम से दूर होने लगे हैं,
गज़ब का है यह अंदाज़ रुसवाई का,
गिरा हिज़ाब देते है पैगाम ज़ुदाई का।

गर है कोई कहता मुझको, सफ़र ये भाता ना मुझको,
रंज कोई ना होता, गर कहने वाला हमदम ना होता।

तुम अब हो मुझसे दूर, ये चलो है हमको मंजूर,
चाहता है दिल तुझको, इसमें मेरा क्या कसूर।

जमीं फ़लक से मिलना चाहे ये है सिर्फ उसका भरम,
जमीं तो हमेशा तरसी है पाने को अब्र के रहमों करम।

Saturday, July 6, 2019

#अनकही_स्मृतियाँ


मौजे-सैलाब थमने सी लगी है, 
साहिलों पे कश्तियाँ मिलने लगी है,
हर सूं तेरी महक सी आती है,
मेरी साँसे तेरी साँसों में बहक जाती है।

मेरी सुबह भी होती है तेरे तसव्वुर में,
और शाम भी ढलती है आसे-दीदार में,
मेरी आँखों में ठहरती हुई ये कारी बदली,
रह रह कर बरसती है मेरे ज़हन में।

आता हूँगा मैं तेरे ख्वाबों ख्यालों में,
महसूस करती होगी तू अकेली मेलों में,
खोजती होंगी तेरी बेसब्र निगाहें,
पाने को दीदार मेरा अजनबी चहेरों में।

कभी कसमासाती तो तू भी होगी ख्वाबों में,
तड़पती होंगी समेंटने को मुझको बाहों में,
दरिया की मानिंद बह जाता हूँगा में,
छोड़ के कश्ती को तेरी मौजें ख्वाबों में।

बेपरवाह है तू अब ज़माने के हर फसाने से,
पूछा मेरा मिज़ाज तूने हर पहचाहन वालों से,
खोजती हुई तू चली आई है इस शहर,
समझकर इश्क को अपनी ज़िन्दगी का मुक़द्दर।

#कृष्ण


आँखों को इंतज़ार का हुनर देकर चला गया,
श्याम छोड़के तू हमें न जाने किधर चला गया।
#रजनीश

Monday, July 1, 2019

#अनकही_स्मृतियाँ

अब हूँ मैं तेरी बेरुखी से बेखबर,
तू जा बसी है मेरी रूह औ जिस्म में इस कदर,
तेरा मेरा साथ फसाना है या सदाकत,
तेरी हर शरारत है गोआ खुदा की एक इनायत। 

दिल में एक अजीब सी हरकत है, 
उनसे मिलने की हरपल हसरत है,
दूर होकर भी बहुत पास होते है वो हमारे, 
गोआ चाँद के आँचल में छिपे हो हज़ारों सितारे। 

नगमे प्यार के गुनगुनाते है हम, और 
काफिलों के मंज़र से कतराते है हम,
इश्क परस्तिश है मजहब अब मेरा,
मौकतल में तू ही तो रहबर है मेरा। 

लबरेज़ है शराबे इश्क हमारा जाम,
आलमे बेखुदी में पढ़ते है सिर्फ तेरा कलाम,
अब हम यूँ ही हो चले है बदनाम,
महफ़िलों हमारी चर्चाएे इश्क है सरेआम।

और शाम फिर से ढलने लगी,
तेरी कमी दिल को खलने लगी,
ये पैगाम फ़िजा में कैसा बहता है,
डूबते दिल को साहिल लगता है