हम जब से मशहूर हुए, शहर में हमारे चर्चे शुरू हुए,
रिश्ते नाते निभने लगे, दरवाज़े हमारे वो दिखने लगे।
कामयाब ज़रूर हुए, पर इल्ज़ामों से जुदा कहाँ हुए,
पेड़ फल जब आए, पत्थर भी उसके हिस्से आए।
किस्मत हुई मेहरबान, यह शहर नही मुझसे अनजान,
चढ़ते सूरज को करे सलाम, शहर में है मेरा नाम।
नकारा था जिन्होंने मुझे, ग़ुरूर था उन्हे अपनी उड़ानों में,
भरोसा क़तई ना था उन्हे, मेरे मज़बूती पाते हुए परों में।
जब तक सीधा चले थे, पीठ पर ख़ंजर खाते आए थे,
थोड़ा चाल बदलकर हमने, ज़माने के होश उड़ाये थे।
चल पड़ा हूँ सफ़र को तो फिर हौसला रखना ज़रूरी है,
वक़्त बेवक्त रश्मे रिवायत निभाना भी तो मजबूरी है।
#रजनीश

Absolutely right, kya khoob kaha he, it's a reality of life.
ReplyDeleteThanks for explaining
Deleteये सत्य वया करता है आज का, आज के दौर में रिश्ते नाते सब ऐसे ही चलते है। थोड़ा सा अंदाज़ बदलो सब बदल जाता है।
ReplyDeleteसत्य है ये बात सर
ReplyDeleteअति उत्तम सर
विचारों की समानता के लिए आभार
DeleteNice sir.🙏🙏
ReplyDeleteThanks
DeleteNice sir.🙏🙏
ReplyDeleteThanks
DeleteBahut khoob 👌👌👌
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