Tuesday, July 9, 2019

#अनकही_स्मृतियाँ

रात सलाखों पर सिर रखकर कराहती ही रही,
ना ख़्वाब आये ना तुम नींद बेवफ़ा ही बनी रही।
#रजनीश

6 comments:

  1. नींद क्यो बदनाम हो सर जी 😊

    आपके शब्द बहुत कुछ सोचने को मजबूर कर देते है ।

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    1. Debjani ...कुछ प्रकाश डाले .... हमें अभिभूत करे

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