Sunday, June 30, 2019

#अनकही_स्मृतियाँ

इश्क मासूमियत औ शरारत है, मरियम औ राधा की मूरत है,
ये नज्मे ख़ास है और मौसम ए हिज्राँ में चिराग़े हिदायत है। 

दिल में बेकरारी सी है उठी जब दोपहर शाम के पहलू में है ढली,
शोला दहका बेखुदे दिल जब आफताब छिपा फ़लक के आगोश में। 

हर सू तेरे आने की आहट है उठी कहरे आफ़ताब जमीं पिघली है अभी,
बहती हवा को ठहरने दीजिये उनके तरन्नुम को लफ्जों में सजने दीजिये। 

इस उठती हुई मौजे मस्ती में, रेज़ा रेज़ा टूटकर उनको बिखरने दीजिये,
घने स्याह बालों की छांव में बादलों को टकराकर बरसने दीजिये। 

शिद्दत से वो लम्हा रूह में है बसा इसरारे जिस्म जब आगोश में है पिघला,
करते है इज़हार प्यार का हम खो जाते है कितने छिपे हुए मयखानों में हम। 

#अनकही_स्मृतियाँ


लफ्ज़ है थम जाते मेरे होठों पर आके, 
उनकी गरम गरम साँसों का एहसास पाके,
दिल है मचलता ताबिश से सुकून पाने को, 
इन जुल्फों के घने साए में पनाह पाने को। 


इश्क न एक फ़रियाद है, नाही मोहताज है इंतज़ार का,
कृष्ण की बांसुरी से निकला, ये एक राग है इज़हार का। 


इश्क ए जूनून में एक सादगी है, मीरा की पाक बन्दगी है,
पशेजुल्मत दीदारे सूरदास है, बेजुबान गायों का आलाप है। 

चाहत है अब पाने को आब की, परवाह नहीं अपनी साख की,
हो जाती है ख़ाके दरिया, पाने को मौजे सैलाब ए सागर की। 

बैचैनियाँ है इस कदर, जैसे साहिलों पर कश्तियाँ है बेसब्र,
मौजे मस्ती की आस में, डूब जाती है सैलाबों के न कयास में। 

#अनकही_स्मृतियाँ



हवाओं की सरसराहाट में किया था महसूस उनका हौले-हौले आना,
फिजाओं में खोजा था उनके चेहरे को हया से सुर्ख लाल हो जाना।

बेखबर थे हम सितमगर के अंदाज़े ए सितम से,
डूब गए दरिया ए अश्क में माजी की रवानगी से।

वो हौले-हौले मेरी साँसों को महका गया,
पल-पल मेरे वजूद में समाता चला गया,

अक्स उनका है डूबता मेरे चश्म ए तर में,  
खोते जाते है हम उनके पेच ओ ख़म में। 

उनको पाने की एक कसक थी अजीब,
हर अज़ीज़ आज लगने लगा था रकीब,
होने लगी है ख्वाबों ख्वाहिशों की तावीर,
मिलने लगी निगाहों को इश्क की तासीर। 

सजने लगी है ख्वाबों ख्यालों की महफिले,  
होने लगी है बेतकल्लुफ वो जब से हम से,
होते हुए हम बेखुद उन बांकी अदाओं में, 
कर न सके बयाँ हाल ए दिल हम उनसे। 

#अनकही_स्मृतियाँ


यूँही गैरों पे एतबार कर, गुज़ारे थे कुछ लम्हें हमने उनके साथ, 
हुई इस दौर में ख्वाहिश चलने की, उनका लेके हाथ में हाथ। 

ख्वाहिशें थी, सजाने को महफिले शान उनकी आशिकी में, 
हमको इल्म न था, बहेंगे जाम पे जाम उनकी यादें बंदगी में। 

अंजाम-ए-इंतज़ार मुकरर्र था, हमको हमारी वफाई का, 
दम-ब-दम मेरा निकले, आरज़ू-ए-चश्म में हरजाई का। 

दिन काटे ही नहीं कटते हैं, दीदार ए यार की चाह में, 
हम रोज़ अपनी शाम सजाते, उनके आने की राह में। 

खोजा था उनको कैनवास पर, खीची हुई आड़ी तिरछी लकीरों में, 
और बड़ी शिद्दत से संजोया था, हर रंग उनका उनकी तस्वीरों में। 




Saturday, June 29, 2019

#कृष्ण

नटखट तू नही श्याम, नटखट ये निगोड़ी बाँसुरी,
सुध बुध छीनी मेरी, बीती जाए रे अब विभावरी,
चंदा गया, गए तारे, सूरज ने भी खिड़की खोली,
छोड़ूँगी न ये मुरली, न सहूँगी मै इसकी ठिठौली,
व्यथित देख राधा को, कान्हा मंद मंद मुस्करायों,
नीलगगन खोल गात, प्रकाश चहुदिशा फैलाओ। 
#रजनीश

Saturday, June 22, 2019

#कृष्ण

नादाँ है जो राधा से पूछते, क्या लगता है कान्हा उसका,
धड़कनो से कभी पूछा है, क्या रिश्ता है दिल से उसका। 
#रजनीश

Wednesday, June 19, 2019

#कृष्ण

जा कान्हा, हमने किया तुम्हे आजाद बंदिशों से,
जा कर दे मुक्त, इस दुनिया को तू साजिशों से,
न रिझा तू बजा बाँसुरिया, तू छलिया साँवरिया,
राम दिए थे पादुका, तू दे दे राधा को ये वेणुका।
#रजनीश

#Cryptocurrency

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#purnmoon #cryptocurrency #blockchain

Sunday, June 16, 2019

#कृष्ण

पलकों में कैद किए कुछ सपने, मनमोहन दूर होकर भी है अपने,

न जाने क्या कशिश है साँसों में, मूरत तेरी बसी मेरे ख्यालों में।

#रजनीश

Friday, June 14, 2019

#कृष्ण

रूठी राधा, सूना जग, उजड़ी आटरिया,
छाई घटाएँ, बरसी घनघोर प्रेम बदरिया,
प्रेम सुधारस भीगी सारी गोकुल नगरियाँ,
सारोबर कीन्ही गात, मधुसूदन बाँसुरिया।
#रजनीश

Wednesday, June 12, 2019

#कृष्ण

रिश्ते है ये नही कोई पाश, अश्क भी आते नही अनायास,
ये है सिर्फ विश्वास, जैसे राधा दिल है सदा कान्हा बास।
#रजनीश 

Sunday, June 9, 2019

#कृष्ण

मेरी मंजिल कान्हा तक है जाती, हर बात की वजह है मिल जाती,
जिंदगी इतनी भी मजबूर नहीं मेरी, श्रीराधे नाम, डगर सरल हुई मेरी। 
#रजनीश

Tuesday, June 4, 2019

#कृष्ण

अंत:स्थल गोविंद मुरारी, काया भई पीताम्बर धारी,
सिर मोर पंखुरियाँ, मन नाचे होके श्याम साँवरयाँ,
मस्तक तिलकधारी, बुद्धि घूमे आगे पीछे गिरधारी,
भृकुटी कटारी, नजर ढूँढे चितचोर मोर मुकुटधारी,
नासिका चमके लवंग, महकी श्वास कस्तूरी सारंग,
कर्ण कुँडल भारी, स्वर स्पंदन सुने गान बृजबिहारी,
कपोल भये शर्म से लाल, छवि झलके बृजगोपाल,
खिले अच्युत अधर, प्यासा मन चाहे दर्शन गिरधर,
ग्रीवा नत शरणम्, व्याकुल चित ढूँढ़े नर नारयणम्,
बाहों पे लिख बनवारी, हथेली बसाए गोवर्धन धारी,
नख नटखट बेहाल, धूलि उड़ाए बंसी बजाए ग्वाल,
छाती में चितचोर, वाणी पुकारे नटखट माखनचोर,
कटि पे तगड़ी, मोहन बनाए सबकी किस्मत बिगड़ी,
उदर ऊखल रस्सियाँ, लीला करे मनमोहन छलिया,
नैनों बसाई सूरत प्यारी, नंदनंदन माधव मुरलीधारी।
#रजनीश

Sunday, June 2, 2019

#FrozenFire

दवा मय में हासिल नहीं ,
सिरे उलझे धागों के मिलें हैं कभी,
खुदी को छोड़कर छलना,
ना ढूंढ वजूद साये में अपना,
इस अहद ए इंसा में,
अब आलम ए वफा कहाँ,
तिजारत ए तवायफ में,
लाज औ वफा ना ढूंढ़,
सरेआम जिस बाजार
दुआ औ इश्क है बिकाऊ,
उस जहाँ भगवा में,
रूहू सूफी संत की ना ढूंढ़,
मायावी ये दुनिया,
आदमी आदमी को डस रहा,
अब बनके इंसा सपेरा,
इंसा में ही जहर ढूँढ़ रहा।  
#रजनीश