Sunday, June 2, 2019

#FrozenFire

दवा मय में हासिल नहीं ,
सिरे उलझे धागों के मिलें हैं कभी,
खुदी को छोड़कर छलना,
ना ढूंढ वजूद साये में अपना,
इस अहद ए इंसा में,
अब आलम ए वफा कहाँ,
तिजारत ए तवायफ में,
लाज औ वफा ना ढूंढ़,
सरेआम जिस बाजार
दुआ औ इश्क है बिकाऊ,
उस जहाँ भगवा में,
रूहू सूफी संत की ना ढूंढ़,
मायावी ये दुनिया,
आदमी आदमी को डस रहा,
अब बनके इंसा सपेरा,
इंसा में ही जहर ढूँढ़ रहा।  
#रजनीश

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