Tuesday, June 4, 2019

#कृष्ण

अंत:स्थल गोविंद मुरारी, काया भई पीताम्बर धारी,
सिर मोर पंखुरियाँ, मन नाचे होके श्याम साँवरयाँ,
मस्तक तिलकधारी, बुद्धि घूमे आगे पीछे गिरधारी,
भृकुटी कटारी, नजर ढूँढे चितचोर मोर मुकुटधारी,
नासिका चमके लवंग, महकी श्वास कस्तूरी सारंग,
कर्ण कुँडल भारी, स्वर स्पंदन सुने गान बृजबिहारी,
कपोल भये शर्म से लाल, छवि झलके बृजगोपाल,
खिले अच्युत अधर, प्यासा मन चाहे दर्शन गिरधर,
ग्रीवा नत शरणम्, व्याकुल चित ढूँढ़े नर नारयणम्,
बाहों पे लिख बनवारी, हथेली बसाए गोवर्धन धारी,
नख नटखट बेहाल, धूलि उड़ाए बंसी बजाए ग्वाल,
छाती में चितचोर, वाणी पुकारे नटखट माखनचोर,
कटि पे तगड़ी, मोहन बनाए सबकी किस्मत बिगड़ी,
उदर ऊखल रस्सियाँ, लीला करे मनमोहन छलिया,
नैनों बसाई सूरत प्यारी, नंदनंदन माधव मुरलीधारी।
#रजनीश

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