#कृष्ण
नटखट तू नही श्याम, नटखट ये निगोड़ी बाँसुरी,सुध बुध छीनी मेरी, बीती जाए रे अब विभावरी,चंदा गया, गए तारे, सूरज ने भी खिड़की खोली,छोड़ूँगी न ये मुरली, न सहूँगी मै इसकी ठिठौली,व्यथित देख राधा को, कान्हा मंद मंद मुस्करायों,नीलगगन खोल गात, प्रकाश चहुदिशा फैलाओ।
#रजनीश
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