Saturday, June 29, 2019

#कृष्ण

नटखट तू नही श्याम, नटखट ये निगोड़ी बाँसुरी,
सुध बुध छीनी मेरी, बीती जाए रे अब विभावरी,
चंदा गया, गए तारे, सूरज ने भी खिड़की खोली,
छोड़ूँगी न ये मुरली, न सहूँगी मै इसकी ठिठौली,
व्यथित देख राधा को, कान्हा मंद मंद मुस्करायों,
नीलगगन खोल गात, प्रकाश चहुदिशा फैलाओ। 
#रजनीश

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