Monday, September 2, 2019

#कृष्ण


कल कल करते कृष्णा घाट, बहती तीर निर्मल वात, 
अब तो आ जाओ मोहन प्यारे, सावन लाया सौगात। 
#कृष्ण

Friday, August 2, 2019

#TrulyTrue


Some people Witness Rains.
Other indeed just get Wet. 
#TrulyTrue

Take guard of your destiny. Trust self voice.
Avoid people who discourage you.
Ignore negativity around you. 
Build confidence not to give up 
and not to give in. 
#TrulyTrue

Respect is converse of money. 
To earn respect, it is spent first. 
However, spend it where you 
do not lose your self respect. 
#TrulyTrue

There is happiness above happiness. 
It belongs to them who, 
forget their self and 
give happiness to others.
#TrulyTrue

As you conquer Fear, you put on Wisdom 
and shred off superstition, 
assumption and cruelty. 
#TrulyTrue

Sometime we fail to understand 
feelings of very close people in our life; 
so never take your closed 
relationship for granted. 
#TrulyTrue

Power of one positive action is enormous 
which overcomes negativity of 
several disappointments in a flash. 
#TrulyTrue

Everyone is gifted and the people 
who open their packages,
they stand out of the crowd. 
#TrulyTrue

Never leave the person
who always spared his time 
to listen to you even when you have 
nothing special to offer. 
#Truly True

No one comes into our life by chance. Everyone who is around us, anyone with whom we interact, represents something, whether to teach us something or to help us improve a situation.
#TrulyTrue

Monday, July 29, 2019

#TrulyTrue


When the Power of Love overcomes 
 the Love of Power, the World will 
start exhibiting Equanimity. 
#TrulyTrue

Birds sing after a storm; why 
shouldn't  people feel as free to 
delight in whatever remains to them?
#TrulyTrue

Life is a swing between centrifugal and 
centripetal forces. The former pushes to 
explore the limit of sky and the latter pulls
to the core. Between the two life exists. 
#TrulyTrue

Be always careful in Insulting someone 
because it becomes Debt on other person 
who may wish to Repay it with interest. 
#TrulyTrue
Love and compassion are necessities,
not luxuries. Without them, humanity 
cannot survive.
#TrulyTrue

Sunday, July 28, 2019

#TrulyTrue

Most Appreciations lead to a Bridge under 
which a River of Selfishness flows !!!
#TrulyTrue

Teachers open the door. You enter by yourself.
#TrulyTrue

Learning is a weightless treasure you always 
carry with ease. 
#TrulyTrue

Cheap things are not good, 
good things are not cheap.
#TrulyTrue

Always, good times or bad, remember the person 
who spared his time to listen to you. 
#TrulyTrue

Thursday, July 18, 2019

#कृष्ण


कान्हा तू राजा तो राधारानी कल्याणी
थिरकते चरणों की रज मेरी जिंदगानी
मैं तेरा दास अरदास करू तेरी बिहारी
तुम्हारे चरणों में उमर कट जाये सारी। 
#रजनीश

#कृष्ण


नींद नहीं आती, अपने गुनाहों के डर से हे गिरधारी,
सो जाता हूँ, सोचकर, तेरा नाम जो है बक्शनहारी। 
#रजनीश

Sunday, July 14, 2019

#कैद_हूँ_ख्वाबों_में

थमी थमी सी हवाएँ, सहमा सहमा सा है कोहरा,
साँसें हैं थमती, याद जब जब आये तेरा चेहरा। 
आसमाँ जब जब रंग बदले, मुठ्ठी से चाँद फिसले,
बदरी हिस्से मेरे आती, लड़ी सितारे जब तू है सजाती। 
क़ैद हूँ ख़्वाबों में, अक्स आइने में है कौन देखता,
टपकना ही है इसे, अश्क़ आँखों में हैं क्यूँ पिघलता। 
वफ़ा तुम ने मुझसे है निभायी कुछ इस क़दर, 
तोहफ़े मे दुश्मनों को ही तुम ने थमा दिया खंजर। 
बेवफाई ख्याल किसे, ख्वाबों को जो पाल लिया,
ख़ंजर डर क्या, ख़्यालों ही ख़ुद घायल कर लिया।
मिलना नही इस दुनिया मे, मैने नई दुनिया बना ली,
यादों को बसाकर, ख़्बावों की नई दुनिया बसा ली। 
#रजनीश

Saturday, July 13, 2019

#कृष्ण


भक्ति तेरी ऐसी देना श्याम, भूल तुम्हे ना पाऊँ मैं,
साँझ सवेरे हर पल कान्हा, तेरा ध्यान लगाऊँ मैं।
#रजनीश

Tuesday, July 9, 2019

#पक्का_सच


इश्क़ जुनूं भी है संजीदगी भी है,
यह कुर्बत भी है, फुरकत भी है,
यह पाकीजगी की वुसअत भी है
रूह मे लिपटी रिफायते बंदगी है।
#रजनीश

#अनकही_स्मृतियाँ

रात सलाखों पर सिर रखकर कराहती ही रही,
ना ख़्वाब आये ना तुम नींद बेवफ़ा ही बनी रही।
#रजनीश

Monday, July 8, 2019

हम जब से मशहूर हुए ....


हम जब से मशहूर हुए, शहर में हमारे चर्चे शुरू हुए,
रिश्ते नाते निभने लगे, दरवाज़े हमारे वो दिखने लगे। 
कामयाब ज़रूर हुए, पर इल्ज़ामों से जुदा कहाँ हुए,
पेड़ फल जब आए, पत्थर भी उसके हिस्से आए। 
किस्मत हुई मेहरबान, यह शहर नही मुझसे अनजान,
चढ़ते सूरज को करे सलाम, शहर में है मेरा नाम। 
नकारा था जिन्होंने मुझे, ग़ुरूर था उन्हे अपनी उड़ानों में,
भरोसा क़तई ना था उन्हे, मेरे मज़बूती पाते हुए परों में।
जब तक सीधा चले थे, पीठ पर ख़ंजर खाते आए थे,
थोड़ा चाल बदलकर हमने, ज़माने के होश उड़ाये थे। 
चल पड़ा हूँ सफ़र को तो फिर हौसला रखना ज़रूरी है,
वक़्त बेवक्त रश्मे रिवायत निभाना भी तो मजबूरी है।
#रजनीश

Sunday, July 7, 2019

#अनकही_स्मृतियाँ


तेरे भेजे हर ख़त में, एक अख्श निहारता हूँ,
और देखकर उसको, उसपे ही मर जाता हूँ।

हर उठती हुई आहट में तेरी आती सी सदायें है,
तेरी कुशादगी ही तो आज मेरी बनी सज़ाएँ है।

कुछ रिश्ते जुड़ से जाते है जो टूटने पर करते है आवाज़,
उन रिश्तों को कैसे जोड़ू, जो टूटने पर नहीं करते है आवाज।

तुम नहीं, ना है तेरा वो एहसास, नाहीं है वो अब समां,
साथ अब मेरे है मेरी जुस्तजू और कुछ बीते हुए लम्हा।

जिन्दगी खीचकर मुझको, कुछ ऐसे मुकाम पर है ले आई,
जहां बीते लम्हों को जोड़के, मैंने तेरी यादों की तस्बीह है बनाई।

थी मेरी जुर्रत साहिल को पाने की, सैलाबों में कश्ती को पार लगाने की,
वोह क्या जाने इश्क है क्या, जिन्होंने किनारों पर ही है सफ़र किया।

वो एक लम्हां तो मुझे याद है, 
तुझे याद है कि नहीं मुझे नहीं पता,
वो तेरा पलके उठाकर जानिब,
फिर गिरा लेना आज भी दिल में है चुभता,
वो तेरी मासूम सी निगाहों का,
बैचनियों से ढूढ़ना मुझको है नहीं भूलता,
वो एक लम्हां तो मुझे याद है, 
तुझे याद है कि नहीं मुझे नहीं पता।

#अनकही_स्मृतियाँ


कुछ उड़ी उड़ी कुछ खोई खोई सी है ये धूल,
चाँद के आँचल को पाने की इसने की है भूल,
भूली है ये रास्ते जो जाते हैं इस के जहां को
मजबूर है बेगानों के शहर में पनाह पाने को।

हो के अब मैं तुम से हमजुदा, जीता हूँ मैं पाने को इनायते खुदा,
जलसे तेरे शरीक थी कायनात, एक था बदनसीब गवाहे वाक्यात।

संवरती हुई मेरी इस जिन्दगी में फिर से एक हलचल हुई है,
पैगाम भेजकर तुमने ख़त में मेरी सलामती की जो खबर ली है।

आसमां छूने की तमन्नाएँ जमीं से दूर तुमको हैं ले आई,
फ़ैले हुए आसमां की हदों से, तेरे जहां में पसरी तन्हाई।

थी तू मेरी जद से कहीं दूर बनके किसी और की आँखों का नूर,
भेजके पैगाम ये सितम किया ताउम्र हमको इंतज़ार का जख्म दिया।

#अनकही_स्मृतियाँ


तेरी उल्फत की निशानियाँ पे ही बन रहा था मेरा यह घरौंदा, 
जालिम ने मांगकर उन बुतों को सुपुर्दे खाक कर दिया बुतकदा।

थमते हुए दिल में है ठहरा एक समुन्दर गहरा
चाँद भी पा गया है कोई आशना कोई दूसरा।

यूँ जा रहे हो, जैसे लौट कर अब कभी ना आओगे,
तन्हा जब होगे रहबरे रहगुज़र हम ही को पाओगे।

रेज़ा रेज़ा दिल है बिखरता जैसै पतझड़ पत्ता पत्ता है टूटता,
माझी थे जो उन्होंने ही डुबो दी कश्ती अश्कों के सैलाब में।

फिजाओं ने भी है मुंह मोड़ा जबसे तुमने मझधार बीच हाथ है छोड़ा,
फिजाओं संग तेरी रवानी से क्यूँ नहीं हैरानी है अपनी परेशानी से।

#अनकही_स्मृतियाँ


तू जमीं और मैं हूँ एक तन्हा सा आसमाँ,
उफ्क़ ही है सिर्फ हमारे मिलन का निशां।

चाह में तू अब्र की है तड़पती और अपने रूप है बदलती,
वो तो ठहरा सितमगर कभी न ठिठका तेरी इन रहगुजर।

अब है न कोई रंज हमको तुम्हारी रुसवाई से,
आदत हो गई हमारी बाते करने की तन्हाई से।

तू चाहे चली जा जितनी दूर, समझकर मुझको एक आवारा
पर तुम हो किसी और के करीब हो ये कैसे दिल को गवारा।

अब बिन तुम ही मेरा बनने लगा है एक सियाह बसेरा,
तिल तिल जल रहा दिल दूर करने को पसरा अँधेरा।

#अनकही_स्मृतियाँ

हसीन ख्वाबों का घरौंदा बनाता रहा मैं, और 
नादानी में उसके तले तेरे आरमनों को रोंदता रहा
छोड़ा था तूने मासूमियत भरा एक पैगाम मेरे नाम
इल्म न था कि ये ज़माना कर देगा हमको बदनाम।

रेज़ा रेज़ा होकर ख्वाब टूटने लगे हैं
जब से वो हम से दूर होने लगे हैं,
गज़ब का है यह अंदाज़ रुसवाई का,
गिरा हिज़ाब देते है पैगाम ज़ुदाई का।

गर है कोई कहता मुझको, सफ़र ये भाता ना मुझको,
रंज कोई ना होता, गर कहने वाला हमदम ना होता।

तुम अब हो मुझसे दूर, ये चलो है हमको मंजूर,
चाहता है दिल तुझको, इसमें मेरा क्या कसूर।

जमीं फ़लक से मिलना चाहे ये है सिर्फ उसका भरम,
जमीं तो हमेशा तरसी है पाने को अब्र के रहमों करम।

Saturday, July 6, 2019

#अनकही_स्मृतियाँ


मौजे-सैलाब थमने सी लगी है, 
साहिलों पे कश्तियाँ मिलने लगी है,
हर सूं तेरी महक सी आती है,
मेरी साँसे तेरी साँसों में बहक जाती है।

मेरी सुबह भी होती है तेरे तसव्वुर में,
और शाम भी ढलती है आसे-दीदार में,
मेरी आँखों में ठहरती हुई ये कारी बदली,
रह रह कर बरसती है मेरे ज़हन में।

आता हूँगा मैं तेरे ख्वाबों ख्यालों में,
महसूस करती होगी तू अकेली मेलों में,
खोजती होंगी तेरी बेसब्र निगाहें,
पाने को दीदार मेरा अजनबी चहेरों में।

कभी कसमासाती तो तू भी होगी ख्वाबों में,
तड़पती होंगी समेंटने को मुझको बाहों में,
दरिया की मानिंद बह जाता हूँगा में,
छोड़ के कश्ती को तेरी मौजें ख्वाबों में।

बेपरवाह है तू अब ज़माने के हर फसाने से,
पूछा मेरा मिज़ाज तूने हर पहचाहन वालों से,
खोजती हुई तू चली आई है इस शहर,
समझकर इश्क को अपनी ज़िन्दगी का मुक़द्दर।

#कृष्ण


आँखों को इंतज़ार का हुनर देकर चला गया,
श्याम छोड़के तू हमें न जाने किधर चला गया।
#रजनीश

Monday, July 1, 2019

#अनकही_स्मृतियाँ

अब हूँ मैं तेरी बेरुखी से बेखबर,
तू जा बसी है मेरी रूह औ जिस्म में इस कदर,
तेरा मेरा साथ फसाना है या सदाकत,
तेरी हर शरारत है गोआ खुदा की एक इनायत। 

दिल में एक अजीब सी हरकत है, 
उनसे मिलने की हरपल हसरत है,
दूर होकर भी बहुत पास होते है वो हमारे, 
गोआ चाँद के आँचल में छिपे हो हज़ारों सितारे। 

नगमे प्यार के गुनगुनाते है हम, और 
काफिलों के मंज़र से कतराते है हम,
इश्क परस्तिश है मजहब अब मेरा,
मौकतल में तू ही तो रहबर है मेरा। 

लबरेज़ है शराबे इश्क हमारा जाम,
आलमे बेखुदी में पढ़ते है सिर्फ तेरा कलाम,
अब हम यूँ ही हो चले है बदनाम,
महफ़िलों हमारी चर्चाएे इश्क है सरेआम।

और शाम फिर से ढलने लगी,
तेरी कमी दिल को खलने लगी,
ये पैगाम फ़िजा में कैसा बहता है,
डूबते दिल को साहिल लगता है

Sunday, June 30, 2019

#अनकही_स्मृतियाँ

इश्क मासूमियत औ शरारत है, मरियम औ राधा की मूरत है,
ये नज्मे ख़ास है और मौसम ए हिज्राँ में चिराग़े हिदायत है। 

दिल में बेकरारी सी है उठी जब दोपहर शाम के पहलू में है ढली,
शोला दहका बेखुदे दिल जब आफताब छिपा फ़लक के आगोश में। 

हर सू तेरे आने की आहट है उठी कहरे आफ़ताब जमीं पिघली है अभी,
बहती हवा को ठहरने दीजिये उनके तरन्नुम को लफ्जों में सजने दीजिये। 

इस उठती हुई मौजे मस्ती में, रेज़ा रेज़ा टूटकर उनको बिखरने दीजिये,
घने स्याह बालों की छांव में बादलों को टकराकर बरसने दीजिये। 

शिद्दत से वो लम्हा रूह में है बसा इसरारे जिस्म जब आगोश में है पिघला,
करते है इज़हार प्यार का हम खो जाते है कितने छिपे हुए मयखानों में हम। 

#अनकही_स्मृतियाँ


लफ्ज़ है थम जाते मेरे होठों पर आके, 
उनकी गरम गरम साँसों का एहसास पाके,
दिल है मचलता ताबिश से सुकून पाने को, 
इन जुल्फों के घने साए में पनाह पाने को। 


इश्क न एक फ़रियाद है, नाही मोहताज है इंतज़ार का,
कृष्ण की बांसुरी से निकला, ये एक राग है इज़हार का। 


इश्क ए जूनून में एक सादगी है, मीरा की पाक बन्दगी है,
पशेजुल्मत दीदारे सूरदास है, बेजुबान गायों का आलाप है। 

चाहत है अब पाने को आब की, परवाह नहीं अपनी साख की,
हो जाती है ख़ाके दरिया, पाने को मौजे सैलाब ए सागर की। 

बैचैनियाँ है इस कदर, जैसे साहिलों पर कश्तियाँ है बेसब्र,
मौजे मस्ती की आस में, डूब जाती है सैलाबों के न कयास में। 

#अनकही_स्मृतियाँ



हवाओं की सरसराहाट में किया था महसूस उनका हौले-हौले आना,
फिजाओं में खोजा था उनके चेहरे को हया से सुर्ख लाल हो जाना।

बेखबर थे हम सितमगर के अंदाज़े ए सितम से,
डूब गए दरिया ए अश्क में माजी की रवानगी से।

वो हौले-हौले मेरी साँसों को महका गया,
पल-पल मेरे वजूद में समाता चला गया,

अक्स उनका है डूबता मेरे चश्म ए तर में,  
खोते जाते है हम उनके पेच ओ ख़म में। 

उनको पाने की एक कसक थी अजीब,
हर अज़ीज़ आज लगने लगा था रकीब,
होने लगी है ख्वाबों ख्वाहिशों की तावीर,
मिलने लगी निगाहों को इश्क की तासीर। 

सजने लगी है ख्वाबों ख्यालों की महफिले,  
होने लगी है बेतकल्लुफ वो जब से हम से,
होते हुए हम बेखुद उन बांकी अदाओं में, 
कर न सके बयाँ हाल ए दिल हम उनसे। 

#अनकही_स्मृतियाँ


यूँही गैरों पे एतबार कर, गुज़ारे थे कुछ लम्हें हमने उनके साथ, 
हुई इस दौर में ख्वाहिश चलने की, उनका लेके हाथ में हाथ। 

ख्वाहिशें थी, सजाने को महफिले शान उनकी आशिकी में, 
हमको इल्म न था, बहेंगे जाम पे जाम उनकी यादें बंदगी में। 

अंजाम-ए-इंतज़ार मुकरर्र था, हमको हमारी वफाई का, 
दम-ब-दम मेरा निकले, आरज़ू-ए-चश्म में हरजाई का। 

दिन काटे ही नहीं कटते हैं, दीदार ए यार की चाह में, 
हम रोज़ अपनी शाम सजाते, उनके आने की राह में। 

खोजा था उनको कैनवास पर, खीची हुई आड़ी तिरछी लकीरों में, 
और बड़ी शिद्दत से संजोया था, हर रंग उनका उनकी तस्वीरों में। 




Saturday, June 29, 2019

#कृष्ण

नटखट तू नही श्याम, नटखट ये निगोड़ी बाँसुरी,
सुध बुध छीनी मेरी, बीती जाए रे अब विभावरी,
चंदा गया, गए तारे, सूरज ने भी खिड़की खोली,
छोड़ूँगी न ये मुरली, न सहूँगी मै इसकी ठिठौली,
व्यथित देख राधा को, कान्हा मंद मंद मुस्करायों,
नीलगगन खोल गात, प्रकाश चहुदिशा फैलाओ। 
#रजनीश

Saturday, June 22, 2019

#कृष्ण

नादाँ है जो राधा से पूछते, क्या लगता है कान्हा उसका,
धड़कनो से कभी पूछा है, क्या रिश्ता है दिल से उसका। 
#रजनीश

Wednesday, June 19, 2019

#कृष्ण

जा कान्हा, हमने किया तुम्हे आजाद बंदिशों से,
जा कर दे मुक्त, इस दुनिया को तू साजिशों से,
न रिझा तू बजा बाँसुरिया, तू छलिया साँवरिया,
राम दिए थे पादुका, तू दे दे राधा को ये वेणुका।
#रजनीश

#Cryptocurrency

With a base of 2.38 billion users on social networks including 1.3 billion plus users on what’s app worldwide with Indian share of over 400 million Whatsapp accounts and 300 million Facebook accounts, #cryptocurrency demands lot of regulations with active contribution from financial sector, regulators, galaxy of experts in terms of collaboration and innovation.
#purnmoon #cryptocurrency #blockchain

Sunday, June 16, 2019

#कृष्ण

पलकों में कैद किए कुछ सपने, मनमोहन दूर होकर भी है अपने,

न जाने क्या कशिश है साँसों में, मूरत तेरी बसी मेरे ख्यालों में।

#रजनीश